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भारत में NGO से जुड़े सरकारी नियम और विनियम (Rules and Regulations for NGOs in India)

  भारत में NGO से जुड़े सरकारी नियम और विनियम (Rules and Regulations for NGOs in India) भारत में किसी भी NGO (ग़ैर-सरकारी संगठन) को संचालित करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित कुछ नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है। ये नियम NGO के पंजीकरण, वित्तीय पारदर्शिता, विदेशी फंडिंग, कर लाभ, और संचालन को सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। 1. NGO के पंजीकरण के नियम (NGO Registration Rules) भारत में NGO को तीन कानूनी ढांचों में से किसी एक के तहत पंजीकृत किया जा सकता है: सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 (Society Registration Act, 1860) यह अधिनियम गैर-लाभकारी संगठनों को एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति देता है। न्यूनतम 7 सदस्यों की आवश्यकता होती है। संगठन को एक कार्यकारी समिति या गवर्निंग बॉडी बनानी होती है। ट्रस्ट एक्ट, 1882 (Indian Trust Act, 1882) यदि कोई व्यक्ति या समूह धर्मार्थ कार्यों के लिए एक ट्रस्ट बनाना चाहता है, तो इसे इस अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जा सकता है। न्यूनतम 2 ट्रस्टी होने चाहिए। यह आमतौर पर धार्मिक, सामाजिक या परोपकारी कार्यों के लिए...

दशहरा स्पेशल — हमारे ब्लॉग की पहली पोस्ट: Balliawala Pariwar Foundation की कहानी, मिशन और अगला बड़ा कदम

  नमस्ते दोस्तों! 🌼 दशहरा के इस पावन मौके पर हम Balliawala Pariwar के ज़रिए एक छोटा-सा कदम और उठा रहे हैं — अपना ब्लॉग शुरू कर रहे हैं। यहाँ हम रूटीन की बातें, हमारे प्रोग्राम्स, ज़मीन पर जो कुछ हो रहा है उसकी असली खबरें, इनसाइट्स और कभी-कभी “हॉट टॉपिक्स” भी सीधी भाषा में बताएँगे — बढ़िया, सरल और काम की बातें। चलिए — इस पहले पोस्ट में सब कुछ सीधा-सादा बताते हैं। दशहरा और हमारा ब्लॉग लॉन्च — क्यों आज? दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का सन्देश देता है — राम ने रावण का दहन करके यही दिखाया था। पर असल जिंदगी में “बुराई” अलग रूप में आती है — बेनियाज़ी, धोखाधड़ी, पारदर्शिता की कमी। इस दशहरा पर हम सिर्फ़ नहीं जला रहे — हम आवाज़ भी उठा रहे हैं: पारदर्शिता, जवाबदेही और समाज सेवा की। इसलिए आज हम अपना ब्लॉग शुरू कर रहे हैं — ताकि आप हमारे काम को समझो, जुड़ो और साथ चलो। छोटी-सी रोचक बात: दशहरा (विजयादशमी) Navratri के बाद आता है और हिन्दू परंपरा में इसे बहुत पुराना त्योहार माना जाता है — हर प्रान्त में अलग रंग-रूप में मनता है। पर असल बात यही है — मिलकर अच्छाई बढ़ानी है। Balliawala Pariwar क्यों...